वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो ख़ुमार था जो उतर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो ख़ुमार था जो उतर गया, थी वो अन-सुनी कोई दास्ताँ, थी वो अन-सुनी कोई दास्ताँ, था कलाम जो बे-असर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, ना मैं चाह कर भी वो बन सका, ना मैं चाह कर भी वो बन सका, ना मैं कोई दिल में उभर सका, मैं वो सच हूँ जो कहीं छुप गया, मैं वो सच हूँ जो कहीं छुप गया, ना हूँ झूठ मैं जो सँवर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, मैं ये दर्द ले के चला गया, मैं ये गर्द में जा के मिल गया, मैं ये दर्द ले के चला गया, मैं ये गर्द में जा के मिल गया, मैं तो था वो ताइरक-ए-बहार, मैं तो था वो ताइरक-ए-बहार, वो रोए क्यूँ, रोए क्यूँ, वो रोए क्यूँ मैं अगर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, बेख़ुदी, बेख़ुदी 'इश्क़ की, बेख़ुदी 'इश्क़ की, बेख़ुदी 'इश्क़ की,
बेख़ुदी – alienation of mind, ecstasy
ख़ुमार – intoxication
कलाम – poems
बे-असर – ineffective
गर्द - dust
ताइरक-ए-बहार - a bird which chirps and brings good news of spring, then disappears
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